अपनी छत का सपना देख रहे लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत वर्ष 2022 तक 19 हजार लोगों को अपनी छत मुहैया कराने का सपना पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। सबके लिए आवास योजना के तहत शहरी विकास विभाग से भी सहमति मिलने के बाद इस पर सुस्त गति से काम चल रहा है। अब तक पीएम आवास योजना के तहत महज 464 आवास आवंटित हुए हैं। केंद्र ने वर्ष 2022 में स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर प्रत्येक परिवार के पास पानी का कनेक्शन, शौचालय, विद्युत आपूर्ति के साथ पक्का आवास देने की योजना बनाई है। इसके तहत 19 हजार लोगों को आशियाना उपलब्ध कराया जाना है।
योजना के तहत एमडीडीए, नगर निगम और आवास विकास की ओर से बिल्डरों की मदद से पीपीपी मोड में मकान बनाए जाने हैं। एमडीडीए और नगर निगम ने वर्ष 2016-17 में डिमांड सर्वे कराया था। इसके बाद योजना पूरी होने तक की कार्ययोजना बनाई गई। जिसमें प्रतिवर्ष योजना के तहत खर्च होने वाली धनराशि तय की। स्लम के लिए जहां 170.274 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, वहीं नॉन स्लम के लिए 128.745 करोड़ से मकान बनाए जाएंगे।
एमडीडीए के साथ पीपीपी मोड में बनेंगे भवन
एमडीडीए की ओर से योजना के तहत 224 भवन ट्रांसपोर्ट नगर और 240 मकान आमवाला तरला में बनाए गए हैं। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित 224 ईडब्ल्यूएस फ्लैट आवंटित हो चुके हैं। 24 ईडब्ल्यूएस फ्लैटों पर जल्द कब्जा दिया जाएगा। इसके अलावा पीपीपी मोड में 750 और 868 मकान बनाने का कार्य प्राइवेट बिल्डरों को दिया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना: अपनी छत के लिए करना होगा इंतजार, दो साल में कैसे बनेंगे 19 हजार घर?